Untitled 1 copy 1 - विभाजन की विभीषिका को याद कर निकला मौन जुलूस।

विभाजन की विभीषिका को याद कर निकला मौन जुलूस।

अयोध्या उत्तर प्रदेश

विभाजन की विभीषिका को याद कर निकला मौन जुलूस।

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अयोध्या।

अयोध्या जिले में विभाजन विभीषिका दिवस के अवसर पर गुरुवार को वर्ष 1947 के विभाजन के दौरान विस्थापन और पीड़ा झेलने वाले परिवारों की स्मृतियों को नमन किया गया।

इस अवसर पर सर्किट हाउस से कलेक्ट्रेट गेट तक मौन जुलूस निकाला गया। जुलूस में विभाजन का दंश झेल चुके परिवारों के सदस्यों के साथ भाजपा पदाधिकारी और बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। मौन जुलूस में शामिल लोग हाथों में तख्तियां लेकर चल रहे थे, जिन पर विभाजन की त्रासदी, विस्थापन और अपने परिजनों को खोने की पीड़ा को दर्शाने वाले संदेश लिखे थे। पूरे रास्ते लोग शांत भाव से आगे बढ़ते रहे। जुलूस के दौरान वर्ष 1947 की उस त्रासदी को याद किया गया, जब लाखों लोगों को अपना घर–बार छोड़कर विस्थापित होना पड़ा था। कई परिवारों ने अपने परिजनों को खोया और लंबे समय तक विस्थापन का दर्द सहा।

कलेक्ट्रेट गेट से जुलूस वापस सर्किट हाउस पहुंचा। इसके उपरांत सर्किट हाउस सभागार में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी में विभाजन की त्रासदी के सामाजिक और मानवीय प्रभावों पर चर्चा की गई। कार्यक्रम में विभाजन पीड़ित परिवारों के सदस्यों को सम्मानित भी किया गया।

संगोष्ठी के मुख्य अतिथि प्रदेश महामंत्री एवं पूर्व सांसद उपेन्द्र रावत ने कहा कि विभाजन की विभीषिका को याद करना केवल इतिहास को दोहराना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को उस त्रासदी से सीख लेने का अवसर देना है। उन्होंने कहा कि विभाजन के दौरान जिन परिवारों ने अपना घर, जमीन और अपनों को खोया, उनकी पीड़ा को देश कभी भुला नहीं सकता। इतिहास की सच्चाई को नई पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है, ताकि ऐसी त्रासदी दोबारा न हो।

विधान परिषद सदस्य पद्मसेन चौधरी ने कहा कि विभाजन का दर्द केवल सीमाओं के बंटवारे तक सीमित नहीं था, बल्कि इसका असर करोड़ों लोगों के जीवन पर पड़ा। उन्होंने कहा कि विस्थापन की पीड़ा झेलने वाले परिवारों के संघर्ष और उनके योगदान को याद करना समाज की जिम्मेदारी है। विभाजन विभीषिका दिवस हमें एकता, सामाजिक समरसता और राष्ट्र की अखंडता के महत्व का संदेश देता है।

संगोष्ठी के दौरान विभाजन पीड़ित परिवारों के सदस्यों ने अपने अनुभव भी साझा किए। उनके संस्मरणों ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों को भावुक कर दिया। वक्ताओं ने कहा कि विभाजन की त्रासदी से जुड़े अनुभव इतिहास के महत्वपूर्ण दस्तावेज हैं, जिन्हें संरक्षित कर युवा पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता है। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने विभाजन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की और देश की एकता एवं अखंडता को मजबूत बनाए रखने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का संचालन विश्व प्रकाश रूपन ने किया।

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