▪सुरेन्द्र सिंह▪
अयोध्या:
डेढ़ साल से अधिक समय तक जिलाधिकारी रहे डॉ. अनिलकुमार का चुनाव से पहले स्थानांतरण कर दिया गया है। डॉ. अनिल ने अपने कार्यों के बल पर न सिर्फ प्रशासनिक बल्कि सामाजिक क्षेत्र में भी अपूर्व छाप छोड़ी। ब्रितानी हुकूमत के हाकिम-हुक्काम की ठसक के विपरीत उनकी शारीरिक भाव-भाषा एवं अंदाज-मिजाज सच्चे लोकसेवक का ¨वब खींचती थी और सामने वाले को आश्वस्त करती थी। इसका परिणाम यह हुआ कि अयोध्या के जिलाधिकारी की कुर्सी संभालने के चंद दिनों के भीतर वे हर आम-ओ-खास के चहेते बन गए। संवेदनशील प्रशासक के साथ कवि, सुसंस्कृत शख्स, धार्मिक मूल्यों-मानकों के प्रति समर्पित किरदार के रूप में भी उनकी छवि निरंतर मोहक बनती गई। यूं तो उनके कुछ कृत्यों की लंबे समय तक नजीर दी जाएगी।

बेसहारा मिली वृद्धा का इलाज कराने से लेकर उसका अंतिम संस्कार कर बेटे का धर्म निभाकर उन्होंने बताया कि लोकशाही में कोई छोटा-बड़ा नहीं होता बल्कि लोकशाही का सच्चा धर्म अपनत्व-आत्मीयता है। गत वर्ष नवंबर में विहिप की धर्मसभा एवं शिवसेना प्रमुख के आगमन के दौरान उन्होंने अपनी प्रशासनिक प्रतिभा का भी बखूबी लोहा मनवाया। पौराणिक नदी तमसा को पुनर्जीवन देने की मुहिम जैसे कार्यों को लेकर उन्हें अयोध्या लंबे समय तक याद करती रहेगी।
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