रामायण कालीन मान्यता का पौराणिक स्थल रामकुंड बदहाली का शिकार

रामायण कालीन मान्यता का पौराणिक स्थल रामकुंड बदहाली का शिकार|

बीकापुर_अयोध्या|

विकासखड क्षेत्र के तोरो माफी में स्थित रामायण कालीन मान्यता का पौराणिक स्थल रामकुंड को करीब एक दशक पूर्व आदर्श जलाशय रूप के रूप में चयनित किया गया था, अब इसी जलाशय को अमृत सरोवर के रूप में चयन कर लिया गया है।
राज्य अमृत सरोवर योजना अंतर्गत मनरेगा से रामकुंड सरोवर का 26 लाख रुपए की लागत से कायाकल्प कराया जा रहा है। तालाब के पूर्व में खुदाई कराई गई थी जिसके चलते तालाब काफी गहरा लेकिन तालाब का पूरा क्षेत्रफल जंगली झाड़ियों और खरपतवार से ढका हुआ है। तथा पूरी तरह सूखा पड़ा हुआ है।
बीकापुर जाना बाजार मार्ग के किनारे तोरो माफी में स्थित रामकुंड जलाशय से लोगों की धार्मिक आस्था जुड़ी हुई है। अयोध्या की प्रसिद्ध 84 कोसी परिक्रमा परि क्षेत्र में शामिल है। तथा रामकुंड के समीप स्थित सीता कुंड 84 कोसी परिक्रमा का सातवा पड़ाव स्थल भी है। 84 कोसी परिक्रमा में शामिल साधु संत सीता कुंड के अलावा यहां स्थित रामकुंड की भी परिक्रमा करते हैं। करीब एक दशक पूर्व रामकुंड सरोवर का आदर्श जलाशय के रूप में चयन करके सौंदर्यीकरण कराया गया था। लेकिन कुछ ही समय बाद सरोवर बदहाल हो गया। सरोवर के चारों तरफ बनाई गई बाउंड्री वाल और गेट घटिया निर्माण के चलते क्षतिग्रस्त हो गया है। चरदीवारी के लिए लगाई गई ईट उठाकर चोर उठा ले गए। ग्राम पंचायत तोरो माफी में रामायण कालीन मान्यता के सीता कुंड, राम कुंड सहित करीब आधा दर्जन कुंड स्थित है। सभी प्राचीन धार्मिक कुंड 84 कोसी परिक्रमा परिक्षेत्र में शामिल है। जिस पर प्राचीन माइलस्टोन लगा हुआ है। कई कुंड बदहाल और अतिक्रमण की चपेट में भी हैं। प्रधान प्रतिनिधि अहमद रजा ने बताया कि चयनित अमृत सरोवर रामकुंड पर अभी साफ सफाई कराई जा रही है। तोरो माफी निवासी सुरेश चंद्र पांडेय, पंडित बिंदेश्वरी प्रसाद पांडेय, नंगा पांडेय, मोतीराम निषाद, राज कपूर गुप्ता सहित स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि अमृत सरोवर के रूप में चयनित रामकुंड का इमानदारी से पूरे बजट के अनुसार सौंदर्यीकरण किया जाना चाहिए। इसके अलावा यहां स्थित अन्य प्राचीन पौराणिक कुडों का भी सौंदर्यकरण किया जाना चाहिए जो प्राचीन धार्मिक धरोहर हैं। लोगों में मान्यता है कि त्रेता युग में 14 वर्ष के वनवास से वापस आने के बाद मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम ने यहां की यात्रा करके यज्ञ और हवन पूजन किया था। श्री राम सांस्कृतिक शोध संस्थान द्वारा भी धार्मिक कुंड पर राम चरण चिन्ह की स्थापना कराई गई है|

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