लखनऊ गुडंबा धर्मांतरण केस में आखिरकार पुलिस ने मुख्य आरोपी को दबोच लिया है। स्कूल आती-जाती एक नाबालिग छात्रा को महीनों तक परेशान करने, उसकी फोटो और वीडियो के दम पर ब्लैकमेल करने और हिंदू धर्म छोड़कर इस्लाम अपनाने व शादी का दबाव बनाने के आरोप में 33 साल के मोहम्मद सईद उर्फ चिड्डा को गिरफ्तार किया गया है। वह गुडंबा थाना क्षेत्र के राजौली गांव का रहने वाला है।
शिकायत जून में हुई थी और गिरफ्तारी नवंबर में। यानी करीब चार महीने तक एक मासूम और उसका परिवार डर के साये में जीता रहा। मामला वही पुरानी पटकथा दोहराता है, जिसमें पहले पीछा, फिर तस्वीरें, फिर ब्लैकमेल और आखिर में धर्म बदलने का दबाव।
लखनऊ गुडंबा धर्मांतरण केस: मां की शिकायत से खुली परतें
पुलिस के मुताबिक 25 जून 2026 को छात्रा की मां ने गुडंबा थाने में तहरीर दी थी। उन्होंने बताया कि स्कूल जाते और लौटते वक्त कुछ लोग उनकी बेटी का रास्ता रोकते हैं, अश्लील टिप्पणियां करते हैं और डराते-धमकाते हैं। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की कई धाराओं के साथ पॉक्सो एक्ट की धारा 7 और 8 में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की।
जांच आगे बढ़ी तो छात्रा के बयान ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया। उसने बताया कि उसकी फोटो और वीडियो का इस्तेमाल कर उसे ब्लैकमेल किया जा रहा था। साथ ही उस पर हिंदू धर्म छोड़कर मुस्लिम धर्म अपनाने और शादी करने का दबाव डाला गया। इसके बाद पुलिस ने केस में उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 2021 की धारा 3 और 5(1) भी जोड़ दीं।
- आरोपी: मोहम्मद सईद उर्फ चिड्डा, उम्र 33 साल, निवासी राजौली, गुडंबा
- पीड़िता: नाबालिग स्कूली छात्रा
- शिकायत: 25 जून 2026, छात्रा की मां की ओर से
- धाराएं: बीएनएस, पॉक्सो एक्ट और यूपी धर्मांतरण विरोधी कानून
- गिरफ्तारी: 6 नवंबर, दोपहर करीब 1 बजे, राजौली पुलिया के पास
मुखबिर की सूचना, पुलिया के पास घेराबंदी
6 नवंबर को उपनिरीक्षक शांतनु बालियान की टीम आरोपियों की तलाश में राजौली पुलिया के आसपास थी। मुखबिर से पक्की खबर मिली और दोपहर करीब एक बजे पुलिस ने घेराबंदी कर सईद को पकड़ लिया। प्रभारी निरीक्षक अंजनी कुमार मिश्र के नेतृत्व वाली टीम ने यह गिरफ्तारी की। पूछताछ में आरोपी ने कहा कि वह अपना पक्ष वकील के जरिए अदालत में रखेगा।
एक नाबालिग पहले ही पकड़ा गया, बाकी की तलाश
पुलिस के मुताबिक इस मामले में शामिल एक बाल अपचारी को पहले ही न्यायिक संरक्षण में भेजा जा चुका है। बाकी आरोपियों की तलाश में दबिश जारी है। सवाल यह भी है कि जिस मामले की शिकायत जून में हो चुकी थी, उसमें मुख्य आरोपी इतने महीनों तक खुला कैसे घूमता रहा। परिवार के लिए राहत की बात यह है कि अब कानून का शिकंजा कस गया है।
यह केस हर उस माता-पिता के लिए चेतावनी है, जिनकी बेटियां रोज स्कूल-कॉलेज के रास्ते से गुजरती हैं। बच्चों के मोबाइल, उनके व्यवहार में अचानक आए बदलाव और रास्ते में होने वाली किसी भी परेशानी को हल्के में न लें। समय पर पुलिस तक पहुंचना ही सबसे बड़ा हथियार है।
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