अब तक कहा जाता था कि मशीनें थकती नहीं, बहाने नहीं बनातीं और काम से जी नहीं चुरातीं। लेकिन चीन के शंघाई से आई इस खबर ने यह भ्रम भी तोड़ दिया। एक असली दुकान में शंघाई रोबोट 24 घंटे ड्यूटी के टेस्ट पर लगाए गए छह ह्यूमनॉइड रोबोट में से दो “प्रोबेशन” में ही फेल हो गए। एक रोबोट भरा हुआ कूड़ेदान देखकर रास्ता भटका और दुकान से बाहर निकल गया, जबकि दूसरा इतना सुस्त निकला कि ग्राहकों की रफ्तार से शेल्फ ही नहीं भर पाया।
सोशल मीडिया पर लोग इसे “रोबोट भी इंसानों जैसे निकले” कहकर खूब मजे ले रहे हैं। किसी ने लिखा कि कचरा देखकर भागने वाला रोबोट बिल्कुल घर के उस सदस्य जैसा है जो डस्टबिन भरते ही गायब हो जाता है।
शंघाई रोबोट 24 घंटे ड्यूटी: क्या था पूरा चैलेंज?
चीनी रोबोटिक्स कंपनी एजिबॉट ने अपने छह जी-2 ह्यूमनॉइड रोबोट को शंघाई के शुहुई इलाके के एक असली कन्वीनियंस स्टोर में 24 घंटे की शिफ्ट पर लगाया। चैलेंज का नाम रखा गया “Robots Never Clock Out”, यानी रोबोट कभी छुट्टी नहीं करते। 2 नवंबर सुबह 10 बजे से 3 नवंबर सुबह 10 बजे तक यह पूरा प्रयोग लाइव दिखाया गया और दुकान आम ग्राहकों के लिए खुली रही।
रोबोट को दिन के चार सबसे मुश्किल वक्त संभालने थे: लंच की भीड़, शाम का रश, रात की ड्यूटी और सुबह का नाश्ता। काम भी असली थे, ग्राहकों का स्वागत, सामान उठाकर देना, कॉफी बनाना, गर्म खाने के ऑर्डर, शेल्फ जांचना और टेबल साफ करना।
- कुल काम: 24 घंटे में 1730 टास्क
- ग्राहकों का स्वागत: 683 बार
- सामान उठाकर दिया: 369 बार
- कॉफी बनाई: 147 कप, गर्म खाने के 126 ऑर्डर पूरे
- शेल्फ चेक और रीस्टॉक: 277 बार, टेबल सफाई 128 बार
- नतीजा: 6 में से 4 पास, 2 फेल
कचरा देखा और दुकान से बाहर
सबसे मजेदार किस्सा सफाई वाले रोबोट का है। रात की शिफ्ट में उसके सामने एक ठसाठस भरा कूड़ेदान आया। रिपोर्टों के मुताबिक इसके बाद वह अपने तय रास्ते से भटक गया, दुकान के दरवाजे से बाहर निकल गया और अपनी जगह पर लौटा ही नहीं। इंटरनेट ने तुरंत फैसला सुना दिया कि रोबोट ने कचरा देखकर नौकरी छोड़ दी।
दूसरा रोबोट: पहल की कमी, रफ्तार भी धीमी
दूसरा फेल होने वाला रोबोट शेल्फ पर सामान जांचने और भरने के लिए लगाया गया था। आकलन में पाया गया कि इसमें पहल करने की कमी थी और यह दुकान की रफ्तार के हिसाब से सामान नहीं भर पा रहा था। यानी वही शिकायत जो अक्सर किसी नए कर्मचारी के बारे में सुनने को मिलती है। दोनों फेल रोबोट को फिलहाल “ऑब्जर्वेशन ग्रुप” में रखा गया है और कंपनी को उम्मीद है कि सुधार के बाद वे भी फुल-टाइम ड्यूटी पा लेंगे।
मजाक के पीछे बड़ा सवाल
हंसी-मजाक अपनी जगह, लेकिन यह प्रयोग बताता है कि रिटेल दुकानों में इंसानों की जगह रोबोट लाने की दौड़ कितनी तेज हो चुकी है। चार रोबोट पास हुए और 1730 काम निपटाए, यह आंकड़ा छोटा नहीं है। फिर भी यह भी साफ हो गया कि अचानक आई अनजानी स्थिति, जैसे एक भरा हुआ डस्टबिन, मशीन का दिमाग घुमा सकती है। कंपनी ने यह भी साफ नहीं किया कि 24 घंटे के दौरान रोबोट को चार्जिंग या इंसानी मदद की जरूरत पड़ी या नहीं। फिलहाल इतना तय है कि इंसानी नौकरियों पर रोबोट का खतरा अभी “प्रोबेशन पीरियड” में ही है।
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