कहते हैं गुनाह कितना भी पुराना हो जाए, सच एक दिन बोल ही पड़ता है। रूस से आया यह मामला इस बात का सबसे डरावना सबूत है। 2009 में एक महिला को चाकुओं से गोद दिया गया। आखिरी सांसें गिनते हुए उसने अपनी खून से सनी उंगलियों से फर्श की टाइल पर कुछ अक्षर लिखे। उस वक्त कोई उन्हें पढ़ नहीं पाया और केस फाइलों में दफन हो गया। अब पूरे 17 साल बाद जांचकर्ताओं ने वह खून से लिखा कातिल का नाम पढ़ लिया, और कातिल निकली मृतका की अपनी सहेली।
खून से लिखा कातिल का नाम: फ्लैट दिखाने बुलाया, सीढ़ियों में मौत
मामला रूस के बश्किरिया (बश्कोर्तोस्तान) गणराज्य के शहर स्टरलिटामाक का है। रूसी मीडिया एनटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक 2009 की सर्दियों में कारोबारी महिला गुजाल मगादेयेवा एक नई इमारत में फ्लैट देखने गई थीं, जिसे वह खरीदना चाहती थीं। सौदा तुरंत पक्का करने के इरादे से वह बैग में करीब पांच लाख रूबल नकद लेकर निकली थीं। कुछ घंटे बाद उसी इमारत के प्रवेश द्वार की सीढ़ियों के पास उनकी लाश मिली। शरीर पर चाकू के 33 घाव थे और पैसों वाला बैग गायब था।
न कोई चश्मदीद, न कोई सीसीटीवी। जांचकर्ताओं के पास बस एक ही सुराग था: हल्के रंग की टाइलों पर खून से उकेरे गए कुछ टेढ़े-मेढ़े, लगभग बेमतलब से दिखने वाले निशान।
- वारदात: 2009, स्टरलिटामाक, बश्किरिया (रूस)
- मृतका: कारोबारी महिला गुजाल मगादेयेवा
- चोटें: चाकू के 33 वार, नकदी से भरा बैग गायब
- सुराग: फर्श की टाइल पर खून से लिखे अक्षर
- आरोपी: सहेली और प्रॉपर्टी एजेंट अल्बिना खलीउल्लीना, अब हाउस अरेस्ट में
सहेली ने ही सुझाया था फ्लैट, आखिरी कॉल भी उसी की
जांच में सामने आया था कि उस इमारत में फ्लैट खरीदने की सलाह गुजाल को उनकी सहेली अल्बिना ने ही दी थी। मरने से पहले गुजाल के फोन पर आखिरी कॉल भी अल्बिना की ही थी, और उसे पता था कि गुजाल अपने साथ मोटी रकम ला रही हैं। 17 साल पहले भी शक की सुई उसी पर घूमी थी, पूछताछ भी हुई, लेकिन अल्बिना ने कहा कि वह अपनी सहेली से बहुत प्यार करती थी और ऐसा कभी नहीं कर सकती। सबूत कम पड़े और केस ठंडे बस्ते में चला गया।
नई तकनीक ने पढ़ डाले अक्षर: “अ-ल-ब”
सालों बाद जांच समिति की टीम ने घटनास्थल की पुरानी तस्वीरों को दोबारा खंगाला। नई तकनीक की मदद से खून के उन धुंधले निशानों को डिकोड किया गया। बश्किरिया जांच समिति के फॉरेंसिक विशेषज्ञ इल्गिज रिसायेव ने बताया कि टाइल पर लिखे शुरुआती अक्षर कातिल के नाम से मेल खाते थे, यानी “अल्ब”। मरती हुई गुजाल अपनी कातिल का नाम लिखने की कोशिश कर रही थीं।
इसके बाद अल्बिना को फिर हिरासत में लिया गया। रिपोर्टों के मुताबिक पहले की तरह उसने इनकार किया, लेकिन आखिरकार टूट गई और जुर्म कबूल कर लिया। उसने माना कि फ्लैट के सौदे के पैसों के लालच में उसने यह वारदात की। अदालत ने उसे घर में नजरबंद यानी हाउस अरेस्ट में भेज दिया है।
“सपने में आती थी, कब्र पर भी जाती थी”
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन 17 सालों में अल्बिना अपने परिवार के साथ बिल्कुल सामान्य जिंदगी जीती रही। घरवालों को भनक तक नहीं थी। पूछताछ में उसने दावा किया कि वह सालों डर में जी रही थी, मृत सहेली उसके सपनों में आती थी और वह उसकी कब्र पर भी जाती थी। लेकिन जांचकर्ता रिसायेव का कहना है कि उन्हें नहीं लगता कि उसकी अंतरात्मा उसे कचोट रही थी, क्योंकि वह जब चाहती तब खुद आकर जुर्म कबूल कर सकती थी। एक मरती हुई महिला की आखिरी गवाही ने 17 साल बाद इंसाफ का रास्ता खोल दिया।
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