मेरठ। क्रिप्टो ट्रेडिंग और डिजिटल टोकन के नाम पर करोड़ों की ठगी की कहानी अब पुलिस लाइन तक पहुँच गई है। आरोपी शाहिद चौधरी—जिसका नाम अंतरराष्ट्रीय ठग नवाब अली उर्फ लविश चौधरी से जुड़ा बताया जाता है—ने निलंबित पुलिसकर्मियों से कथित तौर पर 11 लाख रुपये मांगे। शर्त साफ: पैसा मिले तो जांच में बयान बदल दूँगा। पुलिसकर्मियों ने बातचीत रिकॉर्ड कर एसएसपी के सामने रख दी। एसपी सिटी की जांच में दोनों सिपाही दोषी पाए गए; अब 14ए के तहत कार्रवाई की तैयारी चल रही है।
मामला सिर्फ एक थाने की दीवारों तक सीमित नहीं। लिसाड़ीगेट से दौराला, नोएडा के फर्नीचर शोरूम से मुजफ्फरनगर की चौकी तक—वसूली, सस्पेंशन और दबाव की कड़ियाँ एक-दूसरे से जुड़ती जा रही हैं।
दो अगस्त की FIR: शादाब की शिकायत
2 अगस्त को मेरठ की ट्रैवल्स फर्म के मालिक शादाब ने लिसाड़ीगेट थाने में शाहिद के खिलाफ धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई। आरोप था कि शाहिद ने अपनी गारंटी पर नवाब अली की क्रिप्टो ट्रेडिंग और डिजिटल टोकन स्कीम में लोगों से पैसा लगवाया। कुछ दिनों तक रिटर्न मिला, फिर कंपनी ठप। निवेशक पैसे माँगने लगे तो दौराला के गाँव कैली निवासी शाहिद नोएडा के सेक्टर-93, गेझा भाग गया—वहाँ उसने फर्नीचर शोरूम खोल रखा है।
शादाब के भाई दानिश की शिकायत के बाद साइबर हेल्प डेस्क प्रभारी दारोगा अंकित सागर और पासपोर्ट काम देखने वाले हेड कांस्टेबल नीरज परमार मैदान में आए। थाना प्रभारी दलवीर की अनुमति से शाहिद को करीब एक घंटे हवालात में बैठाया गया। यहीं से शुरू हुआ वह अध्याय जिसे बाद में वसूली का खेल कहा गया।
4.72 लाख: कितना रिकॉर्ड पर, कितना नकद?
शाहिद से कथित तौर पर 4.72 लाख रुपये की वसूली हुई। सीओ की जांच में करीब 1.92 लाख का रिकॉर्ड मिला; बाकी रकम नकद बताई गई। आरोप है कि थाने के पास साइबर कैफे से जुड़े शादाब राव की भी भूमिका रही। दोनों पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया। शादाब राव के खिलाफ रंगदारी-वसूली का मुकदमा भी दर्ज हो चुका है।
ढाई महीने बाद शाहिद की पत्नी रेशमा परवीन ने मेरठ और सहारनपुर के डीआईजी से शिकायत की। पहले एसपी सिटी विनायक भोसले की जांच चली; एक अधूरी रिपोर्ट पर सवाल उठे, फिर डीआईजी ने सीओ क्राइम को 24 घंटे में रिपोर्ट माँगकर दबाव बढ़ाया।
मुजफ्फरनगर कड़ी: खाता अनफ्रीज और एक लाख
लविश के नाम जुड़ने पर शाहिद के बैंक खाते फ्रीज हो गए थे। खाता खुलवाने के नाम पर मुजफ्फरनगर खतौली की पमनावली चौकी प्रभारी दारोगा मोहम्मद आरिफ अली पर एक लाख रुपये माँगने का आरोप लगा। एसएसपी सूरज कुमार राय ने उन्हें भी निलंबित कर दिया। मतलब—मेरठ की वसूली और मुजफ्फरनगर की रिश्वत एक ही सिलसिले की दो कड़ियाँ बन गईं।
पलटवार: 11 लाख की डिमांड और रिकॉर्डिंग
जब शाहिद खुद तहरीर लेकर लिसाड़ीगेट पहुँचा, तब कहानी ने नया मोड़ लिया। आरोप है कि उसने निलंबित पुलिसकर्मियों से समझौते के लिए 11 लाख माँगे—रकम मिलने पर जांच में बयान बदलने का वादा। सिपाहियों ने बातचीत रिकॉर्ड कर ली और एसएसपी के सामने पेश कर दी। एसपी सिटी विनायक भोसले की जांच में दोनों पुलिसकर्मी दोषी करार दिए गए। अब उनके खिलाफ 14ए की कार्रवाई तैयार की जा रही है।
यानी एक तरफ शाहिद क्रिप्टो ठगी और वसूली का आरोपी; दूसरी तरफ वही शाहिद पुलिस पर दबाव का खिलाड़ी। बीच में सस्पेंड सिपाही, रंगदारी का मुकदमा, और कप्तान के सामने बजती रिकॉर्डिंग।
लविश कनेक्शन क्यों भारी पड़ता है
नवाब अली उर्फ लविश चौधरी का नाम क्रिप्टो और डिजिटल टोकन ठगी के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़ा बताया जाता है। शाहिद पर आरोप है कि उसने अपनी “गारंटी” का मुखौटा लगाकर निवेशकों को उसी सर्किट में घसीटा। जब पैसा अटक गया, पीड़ित शाहिद के पीछे पड़े; शाहिद नोएडा शिफ्ट हो गया। FIR, हिरासत, कथित वसूली और अब बयान-बदल सौदा—पूरा चक्र एक ही नाम के इर्द-गिर्द घूम रहा है।
जांच क्या पूछेगी
अभी सवाल साफ हैं। 4.72 लाख में से कितना पीड़ित तक पहुँचा, कितना बीच में अटका? हवालात का एक घंटा किस अनुमति और किस प्रक्रिया से चला? शादाब राव की भूमिका कितनी गहरी है? मुजफ्फरनगर में खाता अनफ्रीज के एक लाख का ट्रेल कहाँ जाता है? और 11 लाख वाली बातचीत—दबाव था या जालसाजी का नया अध्याय?
एसपी सिटी की रिपोर्ट दोनों सिपाहियों को दोषी बता चुकी है। 14ए की गाड़ी अगर आगे बढ़ी तो विभागीय सजा के साथ आपराधिक कोण भी खुल सकते हैं। शाहिद, शादाब, लविश कनेक्शन और बैंक ट्रेल—तीनों मोर्चों पर सबूत ही फैसला लिखेंगे।
आखिरी तस्वीर
मेरठ का यह केस सिर्फ “क्रिप्टो ठगी” की सुर्खी नहीं। यह दिखाता है कि जब ठगी की रकम वसूली के नाम पर थाने पहुँचती है, तो रेखाएँ धुँधली हो जाती हैं—पीड़ित, आरोपी और वर्दी एक ही कमरे में उलझ जाते हैं। दो सिपाही सस्पेंड; एक चौकी प्रभारी बाहर; रंगदारी का मुकदमा; और अब 11 लाख की रिकॉर्डिंग कप्तान की मेज पर।
एक लाइन में: शाहिद चौधरी से कथित 4.72 लाख वसूली के बाद दारोगा-हेड कांस्टेबल सस्पेंड; शाहिद ने बयान बदलने को 11 लाख माँगे; रिकॉर्डिंग एसएसपी तक गई; 14ए की तैयारी—मेरठ क्रिप्टो घोटाला अब पुलिस लाइन का केस है।
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