अयोध्या / मिल्कीपुर। आठ दिन की तलाश के बाद वह खबर आई जिससे पूरा सहुलारा थर्रा गया। इनायतनगर थाना क्षेत्र के गाँव सहुलारा में तीन वर्षीय मासूम सुधांशु उर्फ कल्लू—पुत्र सोमनाथ उर्फ रोहित—का क्षत-विक्षत शव घर के निकट बाग की झाड़ियों में मिला। सिर और धड़ अलग-अलग पड़े थे; दोनों हाथ और पैर मौके से गायब बताए गए। प्रभारी निरीक्षक राजेश सिंह बल लेकर मौके पहुँचे; अवशेष पोस्टमार्टम के लिए भेजे गए। मौत किन परिस्थितियों में हुई और शव इस हालत में कैसे पहुँचा—यही अब जांच का केंद्र है।
मामला सिर्फ एक “गुमशुदगी” की FIR नहीं रह गया। घर के सामने खेलते-खेलते गायब हुआ बच्चा, आठ दिन की बेचैन तलाश, और फिर उसी इलाके की झाड़ियों में बिखरा शव—सहुलारा की यह कहानी अब क्राइम की फाइल बन चुकी है।
29 अक्टूबर: घर के सामने खेलते हुए गायब
29 अक्टूबर को सुधांशु घर के सामने खेल रहा था। परिवार का कहना है कि मासूम अचानक नजरों से ओझल हो गया। गाँववालों और परिवार ने आसपास खंगाला, पर कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद माँ की तहरीर पर पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज कर औपचारिक तलाश शुरू की। ग्रामीणों और पुलिस ने आसपास के इलाकों में काफी खोजबीन की, लेकिन मासूम का पता नहीं चल सका।
आठ दिन बीत गए। हर आहट पर उम्मीद, हर शाम निराशा—सहुलारा के घर में वही इंतज़ार चल रहा था जो गुमशुदा बच्चे के परिवार जीते हैं।
गुरुवार: रस्सी तोड़ भागे गोवंश के पीछे मिला शव
गुरुवार को घर के निकट बाग में पेड़ से बंधे गोवंश की रस्सी टूटी और जानवर भाग निकला। उसके पीछे गए पशुपालक की नजर झाड़ियों में पड़े शव पर पड़ी। पास जाकर देखने पर पहचान लापता मासूम के रूप में हुई। शव क्षत-विक्षत और सड़ी-गली हालत में बताया गया। सिर और धड़ अलग थे; हाथ-पैर मौके पर नहीं मिले।
यानी लापता होने की जगह और शव मिलने की जगह लगभग एक ही परिधि में—घर के सामने का खेल का मैदान और घर के पास का बाग। यह दूरी जांच के लिए उतनी ही संवेदनशील है जितनी शव की हालत।
पुलिस कार्रवाई: मौका-मुआयना और पोस्टमार्टम
सूचना पर प्रभारी निरीक्षक राजेश सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचे। पुलिस ने शव के अवशेष एकत्र कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए। मौत का तरीका, चोटों का क्रम, और शरीर के गायब अंगों का क्या हुआ—ये सवाल अब चिकित्सकीय रिपोर्ट और फॉरेंसिक कड़ियों पर टिके हैं।
इनायतनगर थाना क्षेत्र में यह मामला अब गुमशुदगी से हत्या/बलात्कार-हत्या जैसी गंभीर धाराओं की ओर खुल सकता है—अंतिम राय सबूत तय करेंगे। फिलहाल पुलिस कह रही है कि विभिन्न पहलुओं पर जांच चल रही है।
जांच किन सवालों पर घूमेगी
सबसे बड़ा सवाल साफ है। आठ दिन तक शव घर के इतने पास झाड़ियों में कैसे छिपा रहा? क्या पहले तलाश उस बाग तक पहुँची थी? सिर-धड़ अलग होने और हाथ-पैर गायब होने का कारण जानवरों द्वारा बिगाड़ है या मानवकृत क्रूरता? क्या कोई चश्मदीद, सीसीटीवी, या गाँव की अनोखी हलचल उन दिनों दर्ज हुई?
माँ की तहरीर, गुमशुदगी की डायरी, मौके का नक्शा, पोस्टमार्टम और संभावित डीएनए/फॉरेंसिक—ये ही कड़ियाँ कहानी को अनुमान से सबूत तक ले जाएँगी। सहुलारा छोटा गाँव है; छोटी परिधि में बड़ी क्रूरता की गुंजाइश जांच एजेंसी को और तेज कदमों की ओर धकेलती है।
परिवार और गाँव का सदमा
तीन साल का बच्चा—गुलाबी कमीज, मुस्कान वाली तस्वीर—अब सिर्फ यादों और केस डायरी में बचा है। परिवार के लिए आठ दिन का इंतज़ार एक झटके में हमेशा के लिए टूट गया। गाँववाले, जो तलाश में शामिल रहे, अब उसी बाग को देखकर सिहर रहे हैं जहाँ पशुपालक की नजर पहले शव पर पड़ी।
स्थानीय स्तर पर अफवाहें और डर दोनों तेज होते हैं ऐसे मामलों में। पुलिस की जिम्मेदारी है कि जांच شفاف रहे, सच्चाई बाहर आए, और मासूम की मौत का जवाब सिर्फ कागजी FIR न रह जाए।
आखिरी तस्वीर
मिल्कीपुर-सहुलारा का यह मामला अयोध्या क्षेत्र की उन घटनाओं में शुमार हो गया है जो बच्चों की सुरक्षा पर सवाल छोड़ जाती हैं। घर के सामने खेल, आठ दिन की गुमशुदगी, झाड़ियों में बिखरा शव, और इनायतनगर थाने की तेज होती जांच—चार बिंदु एक ही त्रासदी की कड़ी हैं।
एक लाइन में: 29 अक्टूबर से लापता तीन वर्षीय सुधांशु उर्फ कल्लू का क्षत-विक्षत शव गुरुवार को सहुलारा के बाग में मिला; सिर-धड़ अलग, हाथ-पैर गायब; प्रभारी राजेश सिंह मौके पर; पोस्टमार्टम के साथ परिस्थितियों की जांच जारी—मिल्कीपुर अब क्राइम की सुर्खी है।
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