मोहाली। भारतीय हॉकी टीम ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उसे कभी कमतर नहीं आंका जा सकता। गुरुवार को मोहाली के ओलंपियन बलबीर सिंह अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में खेले गए एशियन चैंपियंस ट्रॉफी 2026 के फाइनल में भारत ने शुरुआती झटके से उबरते हुए जापान को 4-1 से धूल चटा दी। इसके साथ ही भारत ने रिकॉर्ड छठी बार यह खिताब जीता, अपना ताज बचाया और पूरे टूर्नामेंट में अजेय रहते हुए अभियान खत्म किया।
एशियन चैंपियंस ट्रॉफी फाइनल: तीसरे मिनट में झटका
मैच की शुरुआत भारत के लिए किसी बुरे सपने जैसी रही। जापान ने उम्मीद के उलट रक्षात्मक खेल के बजाय शुरू से हमला बोला। तीसरे मिनट में सर्कल के ठीक बाहर अनमार्क्ड खड़े काज़ुमासा मात्सुमोतो ने गेंद ली, तीन कदम अंदर आए और गोलकीपर सूरज करकेरा के दस्तानों और नियर पोस्ट के बीच के छोटे से गैप से गेंद टॉप कॉर्नर में ठोक दी। जापान 1-0 से आगे हो गया और स्टेडियम में सन्नाटा पसर गया।
जापान की दीवार, भारत की बेचैनी
इसके बाद भारत ने लगातार हमले किए, लेकिन जापान के अनुशासित डिफेंस और गोलकीपर किशो कुरोदा व ताकुमी कितागावा ने हर कोशिश नाकाम की। स्पोर्टस्टार के मुताबिक भारत को पहला पेनल्टी कॉर्नर 33वें मिनट में जाकर मिला। भारत ने 22 सर्कल एंट्री कीं और 12 शॉट लगाए, फिर भी गोल नहीं हो रहा था। हार्दिक सिंह, विवेक सागर प्रसाद और नीलकांत शर्मा ने मिडफील्ड में जान झोंक दी, पर फॉरवर्ड आसान मौके गंवाते रहे।
42वें मिनट में पलटा पूरा खेल
आखिरकार 42वें मिनट में तीसरे पेनल्टी कॉर्नर पर भारत ने वेरिएशन आज़माया, गेंद को ज़िंदा रखा गया और शिलानंद लाकड़ा ने ज़ोरदार शॉट से बराबरी का गोल दाग दिया। इस गोल के साथ ही जापान का किला ढह गया और भारत अपनी पहचान वाली तेज़, लयबद्ध हॉकी में लौट आया। इसके बाद दिलप्रीत सिंह और जुगराज सिंह समेत भारतीय खिलाड़ियों ने ताबड़तोड़ तीन और गोल कर मुकाबला 4-1 पर खत्म किया।
मैच की बड़ी बातें
- स्कोर: भारत 4 – 1 जापान (फाइनल, मोहाली)
- जापान का गोल: काज़ुमासा मात्सुमोतो (तीसरा मिनट)
- भारत की वापसी: शिलानंद लाकड़ा का बराबरी गोल (42वां मिनट)
- भारत का रिकॉर्ड छठा खिताब, लगातार खिताब का बचाव
- पूरे टूर्नामेंट में भारत अजेय
- कांस्य पदक: मलेशिया ने कोरिया को 5-2 से हराया
कोच फुल्टन: डिफेंस ही कुंजी
मुख्य कोच क्रेग फुल्टन ने जीत के बाद डिफेंस को टीम की सबसे बड़ी ताकत बताया। हालांकि फाइनल के पहले तीन क्वार्टर में दिखी जल्दबाज़ी और फिनिशिंग की कमी आगे के बड़े टूर्नामेंटों से पहले टीम के लिए सबक भी है। फिर भी, दबाव में पिछड़ने के बाद जिस अंदाज़ में टीम ने वापसी की, उसने साफ कर दिया कि यह टीम बड़े मैच जीतना जानती है।
हफ्ते के बीच में भी खचाखच भरा स्टेडियम
कामकाजी दिन होने के बावजूद मोहाली के स्टैंड्स खचाखच भरे थे और 42वें मिनट के बाद पूरा स्टेडियम ‘इंडिया-इंडिया’ के नारों से गूंज उठा। एशिया में भारत का दबदबा कायम है और यह जीत आने वाले अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों से पहले टीम का आत्मविश्वास कई गुना बढ़ाएगी।
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