PoK के रावलकोट में धरने पर फायरिंग और ड्रोन के आरोप: मौतों पर 3 से 7 तक के दावे, सच क्या है?

रावलकोट / नई दिल्ली (ऑनलाइन समाचार अयोध्या डेस्क): पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर (PoK) के रावलकोट शहर में गुरुवार, 5 नवंबर 2026 की सुबह एक बार फिर हालात बिगड़ गए। स्थानीय नागरिक संगठनों का आरोप है कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने शहर में चल रहे शांतिपूर्ण धरनों को हटाने के लिए भारी फायरिंग की और ड्रोन का इस्तेमाल किया। इस कार्रवाई में मौतों को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं — कोई 3 लोगों की मौत बता रहा है तो कोई कम से कम 7। ध्यान रहे, इनमें से किसी भी आंकड़े की अब तक स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।

📌 रावलकोट की घटना: अब तक क्या पता है (Key Highlights)

  • कहां और कब: रावलकोट (PoK) में मटियालमेरा बस टर्मिनल, उमर फारूक चौक समेत कई जगहों पर लगे धरनों को गुरुवार तड़के हटाने की कार्रवाई हुई।
  • मौतों के दावे अलग-अलग: UKPNP ने कम से कम 7 मौतें और 18 घायल होने का दावा किया है; कुछ रिपोर्टों में 3 नागरिकों की मौत की बात कही गई है।
  • ड्रोन हमले का आरोप: एक घर पर कथित ड्रोन हमले और उसमें बच्चों की मौत की आशंका जताई गई है, जिसकी पुष्टि अभी बाकी है।
  • प्रशासन का पक्ष विरोधाभासी: कुछ अधिकारियों का कहना है कि पहले प्रदर्शनकारियों की ओर से फायरिंग हुई; घायलों को लेकर भी प्रशासन और पुलिस के बयान मेल नहीं खाते।


रावलकोट में गुरुवार तड़के क्या हुआ?

समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (UKPNP) ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने गुरुवार तड़के रावलकोट के मटियालमेरा बस टर्मिनल, उमर फारूक चौक और अन्य स्थानों पर चल रहे शांतिपूर्ण धरनों को निशाना बनाया। संगठन का दावा है कि इस कार्रवाई में भारी मशीनगनों, बख्तरबंद वाहनों और ड्रोन का इस्तेमाल किया गया।

ये धरने जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) से जुड़े आंदोलन का हिस्सा बताए जा रहे हैं। JAAC लंबे समय से इस इलाके में बुनियादी सुविधाओं, बिजली-आटे की कीमतों, संपत्ति की सुरक्षा और नागरिक अधिकारों को लेकर आंदोलन कर रही है। JAAC का आरोप है कि धरना हटाने के लिए सीधे गोलीबारी और ड्रोन का सहारा लिया गया।

मौत के आंकड़ों पर भारी विरोधाभास: 3 या 7 से ज़्यादा?

इस घटना की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि हताहतों की संख्या को लेकर अलग-अलग स्रोत अलग-अलग आंकड़े दे रहे हैं। अब तक सामने आए प्रमुख दावे इस प्रकार हैं:

  • UKPNP (IANS के हवाले से): कम से कम 7 लोगों की मौत और 18 लोग गंभीर रूप से घायल। संगठन ने तीन मृतकों के नाम — 35 वर्षीय आतिफ जरदीस, 30 वर्षीय एहतिशाम यूनिस और 32 वर्षीय आदिल रशीद — बताए हैं। साथ ही चार बच्चों की मौत की आशंका जताई है, जिसके बारे में संगठन ने खुद कहा है कि इन दावों का “तत्काल स्वतंत्र सत्यापन” ज़रूरी है।
  • Times Now (JAAC के हवाले से): शुरुआती रिपोर्टों में मटियाल मीराह इलाके में लगभग 3 नागरिकों की मौत की बात कही गई।
  • ABP Live (JAAC से जुड़े दावे): करीब 7 लोगों की मौत और 23 घायल।
  • News18: JAAC ने ड्रोन और फायरिंग के आरोप लगाए हैं, लेकिन घायलों की संख्या और ड्रोन हमले के दावे स्वतंत्र रूप से स्थापित नहीं हो सके हैं। स्थानीय आउटलेट ‘आज़ादी टाइम्स’ ने 3 मौतों की बात कही, जो अपुष्ट है।

यानी फिलहाल मौतों का आंकड़ा 3 से लेकर 7 या उससे अधिक के बीच बताया जा रहा है। इनमें से कोई भी संख्या अभी किसी स्वतंत्र एजेंसी, अस्पताल या आधिकारिक दस्तावेज़ से प्रमाणित नहीं है।

ड्रोन हमले का आरोप: एक घर जलकर खाक?

UKPNP के बयान के अनुसार, मटियालमेरा बस टर्मिनल के पास शकील खान नाम के व्यक्ति का घर कथित ड्रोन हमले के बाद आग में नष्ट हो गया। संगठन ने कहा कि “परेशान करने वाली खबरें हैं कि इस घटना में चार बच्चों की मौत हो सकती है।” हालांकि संगठन ने स्वयं स्पष्ट किया कि इन दावों की स्वतंत्र जांच ज़रूरी है और हताहतों की संख्या बढ़ने की आशंका है।

प्रशासन और पुलिस का पक्ष भी उलझा हुआ

दूसरी ओर, PoK प्रशासन और पुलिस के बयान भी एक-दूसरे से मेल नहीं खा रहे। रिपोर्टों के मुताबिक कुछ अधिकारियों का दावा है कि पहले प्रदर्शनकारियों की ओर से गोली चलाई गई, जिसके बाद कार्रवाई हुई। वहीं ज़िला प्रशासन और पुलिस के बीच इस बात पर भी अलग-अलग बातें सामने आई हैं कि घायल होने वालों में कौन-कौन शामिल है। इलाके में इंटरनेट और संचार पर पाबंदियों की खबरों के कारण ज़मीनी जानकारी बाहर आने में देरी हो रही है, और स्वतंत्र पत्रकारों की पहुंच सीमित है।

संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञ पहले ही जता चुके हैं चिंता

गौरतलब है कि हाल ही में संयुक्त राष्ट्र के छह विशेष प्रतिवेदकों (UN Special Rapporteurs) ने पाकिस्तान सरकार को पत्र लिखकर JAAC को आतंकवादी संगठन घोषित किए जाने पर गंभीर सवाल उठाए थे। IANS के अनुसार, विशेषज्ञों ने आशंका जताई थी कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप नहीं है और प्रदर्शनों के दौरान अत्यधिक बल प्रयोग, गैर-न्यायिक हत्याओं, मनमानी गिरफ्तारियों और संचार पर पाबंदियों के आरोप सामने आए हैं। UKPNP ने अब संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से रावलकोट की स्थिति पर तुरंत ध्यान देने और स्वतंत्र जांच की मांग की है।

पृष्ठभूमि: जून की कार्रवाई से अलग है आज की घटना

PoK में नागरिक आंदोलनों पर सख्त कार्रवाई का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले जून 2026 में भी क्षेत्र में प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई और भारी हताहतों की खबरें आई थीं। सोशल मीडिया पर उस समय के आंकड़ों को आज की घटना से जोड़कर साझा किया जा रहा है, जो भ्रामक है। पाठकों से अपील है कि जून की पुरानी रिपोर्टों को 5 नवंबर की रावलकोट घटना का आंकड़ा न समझें।

आगे क्या?

फिलहाल रावलकोट में तनाव बना हुआ है। मौतों और घायलों की वास्तविक संख्या, ड्रोन हमले के आरोप और फायरिंग की शुरुआत किसने की — इन सभी सवालों के जवाब स्वतंत्र जांच और आधिकारिक जानकारी आने के बाद ही साफ होंगे। ऑनलाइन समाचार अयोध्या इस खबर पर लगातार नज़र बनाए हुए है और पुष्ट जानकारी मिलते ही इसे अपडेट किया जाएगा।

दुनिया की अन्य बड़ी खबरों के लिए पढ़ते रहें ऑनलाइन समाचार अयोध्या।


स्रोत: IANS (UKPNP का बयान), News18, Times Now और ABP Live की रिपोर्ट। हताहतों से जुड़े सभी आंकड़े संगठनों के दावे हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि बाकी है। प्रतीकात्मक तस्वीर: रावलकोट का मोंग रोड, फोटो: Adnanrail (Wikimedia Commons, CC BY-SA 3.0)।

देश-दुनिया की हर बड़ी खबर, सबसे पहले और सबसे सटीक – पढ़ते रहें ‘ऑनलाइन समाचार अयोध्या’।

Super Admin

Recent Posts

KGMU धर्मांतरण रैकेट का बड़ा पर्दाफाश, 100 से ज्यादा डॉक्टर शामिल, मौलानाओं से जुड़े तार

KGMU धर्मांतरण केस में UP STF की जांच आगरा SNMC और एटा मेडिकल कॉलेज तक… Read More

42 minutes ago