
नई दिल्ली: वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार (5 नवंबर 2026) को पीएम मोदी नीति आयोग की नई लीडरशिप के साथ अहम बैठक की। समाचार एजेंसी PTI ने नीति आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से बताया कि प्रधानमंत्री ने आयोग की नई टीम जिन मुद्दों पर काम कर रही है, उनकी ‘फर्स्ट-हैंड’ जानकारी ली। बैठक में आयोग के सदस्यों ने विकसित भारत 2047 के विजन के अनुरूप अपनी नीतियों और कार्यों पर प्रेजेंटेशन दिया।
खास बात यह रही कि प्रधानमंत्री आमतौर पर नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की सालाना बैठक की अध्यक्षता करने या बजट से पहले अर्थशास्त्रियों से चर्चा के लिए आयोग जाते रहे हैं, लेकिन इस तरह सीधे नई टीम से उनके काम का ब्योरा लेना असामान्य माना जा रहा है। The Economic Times ने भी इसे ‘असामान्य’ कवायद बताया।
PTI के मुताबिक बैठक में नीति आयोग की पूरी नई टीम मौजूद रही। इसमें शामिल प्रमुख चेहरे इस प्रकार हैं:
| नाम | पद |
| अशोक लाहिड़ी | उपाध्यक्ष (Vice Chairman) |
| अनुराग जैन | मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) |
| राजीव गौबा | सदस्य |
| आर. बालासुब्रमण्यम | सदस्य |
| जोराम अनिया | सदस्य |
| के.वी. राजू | सदस्य |
| एम. श्रीनिवास | सदस्य |
| गोबर्धन दास | सदस्य |
| अभय करंदीकर | सदस्य |
इनके अलावा आयोग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में मौजूद रहे।
IANS की रिपोर्ट के अनुसार, बैठक में नीति आयोग के प्रत्येक सदस्य से दो स्लाइड का प्रेजेंटेशन देने की अपेक्षा थी, जिसमें वे प्रमुख मुद्दे, नीतिगत पहल और अपने कामकाज के क्षेत्र बताएं। प्रधानमंत्री से उम्मीद थी कि वे चल रहे नीतिगत कार्यों की प्रगति की समीक्षा करेंगे, वैश्विक अनिश्चितताओं से पैदा चुनौतियों पर चर्चा करेंगे और 2027-28 के केंद्रीय बजट के लिए प्रमुख प्राथमिकताओं की रूपरेखा तय करेंगे।
चर्चा के केंद्र में मुख्य रूप से ये विषय रहने की बात कही गई:
The Economic Times की रिपोर्ट के मुताबिक यह बैठक ऐसे समय हुई है जब सरकार 2027-28 के बजट की प्राथमिकताएं तय करना शुरू कर रही है। वैश्विक स्तर पर ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव, पश्चिम एशिया में तनाव और व्यापारिक अनिश्चितताओं के बीच सरकार की कोशिश है कि ग्रोथ बनी रहे, मैन्युफैक्चरिंग बढ़े और नौकरियां पैदा हों। रिपोर्ट में बताया गया कि प्रधानमंत्री आयोग में नियुक्त सेक्टोरल विशेषज्ञ सदस्यों से उनके क्षेत्रों की प्रमुख जरूरतें और घटनाक्रम समझना चाहते थे।
नीति आयोग (National Institution for Transforming India) ने जनवरी 2015 में योजना आयोग की जगह ली थी। यह केंद्र सरकार का प्रमुख नीति थिंक टैंक है, जो केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों और अन्य हितधारकों के साथ मिलकर समावेशी और टिकाऊ विकास की रणनीतियां तैयार करता है और सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) को बढ़ावा देता है। प्रधानमंत्री इसके अध्यक्ष होते हैं।
इससे पहले 11 जून को प्रधानमंत्री मोदी ने नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन कल्चरल सेंटर में नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल बैठक की अध्यक्षता की थी। उस बैठक की थीम ‘विकसित भारत @2047 के लिए समावेशी मानव विकास’ थी और इसमें सभी 28 राज्यों तथा पांच केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री, उपराज्यपाल और प्रशासक शामिल हुए थे। उस बैठक में मानव पूंजी, कौशल विकास, उत्पादक रोजगार, स्वास्थ्य और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे विषयों पर चर्चा हुई थी।
विकसित भारत @2047 सरकार का दीर्घकालिक विजन है, जिसका लक्ष्य आजादी के 100 साल पूरे होने तक, यानी 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाना है। नीति आयोग इस विजन के लिए सेक्टर-वार रोडमैप और नीतिगत सुझाव तैयार करने में अहम भूमिका निभा रहा है। जानकारों का मानना है कि नई टीम के साथ प्रधानमंत्री की सीधी बैठक आने वाले बजट और सुधारों की दिशा का संकेत दे सकती है। बैठक में हुए फैसलों या निर्देशों के बारे में आधिकारिक विस्तृत ब्योरा अभी जारी नहीं किया गया है।
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स्रोत: PTI, IANS एवं The Economic Times की रिपोर्ट्स। फीचर्ड इमेज: नीति आयोग गवर्निंग काउंसिल बैठक की फाइल फोटो (PIB/Wikimedia Commons, GODL-India)।
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