
नई दिल्ली। रसोई का बजट पहले से तंग हो तो राशन की थैली ही सहारा है। केंद्र ने साफ कर दिया—प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) के तहत राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के लाभार्थियों को दिसंबर 2028 तक मुफ्त अनाज मिलता रहेगा। करीब 81.35 करोड़ लोगों को चावल, गेहूँ या मोटा अनाज बिना दाम के फेयर प्राइस शॉप से उठाना है। पहले जहाँ चावल तीन रुपये, गेहूँ दो रुपये और मोटा अनाज एक रुपये किलो पड़ता था, वहाँ अब पूरी तरह मुफ्त।
यह फैसला सिर्फ कागजी घोषणा नहीं। जनवरी 2024 से पाँच साल का विस्तार, अनुमानित खर्च करीब 11.80 लाख करोड़ रुपये—पूरा बोझ केंद्र पर। संसदीय जवाब में यह भी कहा गया कि फिलहाल 31 दिसंबर 2028 के बाद और विस्तार का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं। मतलब मौजूदा विंडो तक योजना की रेखा साफ है; उसके बाद नया फैसला अलग होगा।
NFSA में दो बड़े वर्ग हैं। अंत्योदय अन्न योजना (AAY)—सबसे गरीब परिवार—को प्रति परिवार प्रति माह 35 किलो अनाज मिलता है, सदस्यों की संख्या चाहे जितनी हो। कई राज्यों में व्यवहार में यह अक्सर 21 किलो चावल + 14 किलो गेहूँ जैसा मिश्रण होता है, लेकिन कुल हक 35 किलो घरेलू है। कार्ड अक्सर पीला/गुलाबी रंग की श्रेणी में पहचाना जाता है।
प्राथमिकता परिवार (PHH)—सफेद/खाकी कार्ड वाली लाइन—को प्रति व्यक्ति प्रति माह 5 किलो अनाज मिलता है। घर में पाँच सदस्य हैं तो 25 किलो, सात हैं तो 35 किलो—यहाँ हिसाब व्यक्ति पर चलता है, पूरे परिवार के फ्लैट कोटे पर नहीं।
दोनों श्रेणियों में अनाज अब मुफ्त है। FPS पर सही कार्ड, बायोमेट्रिक/OTP और स्टॉक उपलब्धता—यही तीन कड़ियाँ राशन उठाने का असल गेट हैं।
राज्यों के अपने मानदंड होते हैं, लेकिन सामान्य रेखा यह है—भूमिहीन मजदूर, सीमांत किसान, कारीगर, बुजुर्ग/विधवा/दिव्यांग मुखिया वाले परिवार, विशेष कमजोर जनजातीय समूह (PTG), HIV प्रभावित जैसे अति-गरीब वर्ग। राज्य की अति-गरीबी आय सीमा से नीचे रहना जरूरी।
अयोग्यता की सूची भी साफ है—सरकारी नौकरी, आयकर रिटर्न भरने वाला परिवार, चार पहिया वाहन/ट्रैक्टर, पाँच एकड़ से ज्यादा सिंचित भूमि जैसी स्थिति में आमतौर पर AAY नहीं बनता। गलत नाम कटवाना और सही नाम लगवाना—दोनों राज्य/जिला खाद्य आपूर्ति तंत्र का काम है; केंद्र कवरेज तय करता है, पहचान राज्य करता है।
नए कार्ड के लिए परिवार की महिला मुखिया को प्राथमिकता दी जाती है—NFSA की भावना भी यही है कि वयस्क महिला को परिवार का मुखिया माना जाए। दस्तावेज आम तौर पर पहचान, निवास, आय/गरीबी प्रमाण और परिवार के सदस्यों की लिस्ट से जुड़ते हैं। आवेदन nfsa.gov.in, राज्य खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति पोर्टल या CSC केंद्र से हो सकता है। वेरिफिकेशन अक्सर 15–30 दिन में पूरा होने की बात कही जाती है—जिला-दर-जिला स्पीड अलग हो सकती है।
यूपी या किसी एक राज्य की अलग दरें यहाँ न गढ़ें; सामान्य NFSA नियम यही हैं। स्थानीय कोटा, स्टॉक और रंग-कोड की बारीकी जिला आपूर्ति कार्यालय या FPS डीलर से पूछें।
वन नेशन वन राशन कार्ड (ONORC) का मतलब—अपना हक अपने घर वाले FPS तक सीमित नहीं। प्रवासी मजदूर किसी और राज्य/जिले की दुकान से भी पोर्टेबिलिटी से अनाज उठा सकता है, बशर्ते सिस्टम और बायोमेट्रिक काम कर रहे हों। मेरा राशन ऐप पर पात्रता, लेन-देन इतिहास और नजदीकी दुकान देखने की सुविधा मिलती है। शिकायत या जानकारी के लिए टोल-फ्री 1967 नंबर याद रखें।
मुफ्त अनाज तभी काम आता है जब पोर्टेबिलिटी और डिजिटल ट्रेल दोनों चालू हों। कार्ड है लेकिन नाम कट गया, या बायोमेट्रिक मैच नहीं हुआ—तो थैली खाली लौटती है। इसलिए मोबाइल नंबर अपडेट, आधार-राशन लिंकिंग और ऐप पर ट्रांजेक्शन चेक—तीनों को नजरअंदाज मत करें।
AAY परिवार के लिए 35 किलो मुफ्त अनाज महीने का स्थिर सहारा है। PHH परिवार में सदस्यों के हिसाब से 5 किलो प्रति व्यक्ति—बड़े परिवार में कोटा बढ़ता है। पहले रुपये-दो-तीन किलो वाला बोझ भी अब नहीं। पाँच लाख से ज्यादा FPS के नेटवर्क पर एक जैसा मुफ्त वितरण—यही PMGKAY का राष्ट्रीय स्वरूप है।
केंद्र का संदेश सीधा है: 2028 के अंत तक फूड सिक्योरिटी की यह लाइन कायम। 81.35 करोड़ का आंकड़ा Census 2011 आधारित कवरेज (ग्रामीण ~75%, शहरी ~50%) से जुड़ा है। नाम जोड़ने-काटने का काम राज्य लगातार चलाते हैं—अयोग्य नाम हटाने और योग्य जोड़ने का चक्र थमता नहीं।
दिसंबर 2028 तक मुफ्त राशन—AAY को 35 किलो प्रति परिवार, PHH को 5 किलो प्रति व्यक्ति। पहले सब्सिडी वाले एक-दो-तीन रुपये किलो की जगह अब जीरो। 11.80 लाख करोड़ का पाँच साल का खाका, ONORC पोर्टेबिलिटी, मेरा राशन ऐप और हेल्पलाइन 1967। नया कार्ड चाहिए तो महिला मुखिया, सही दस्तावेज, nfsa.gov.in/राज्य FCS/CSC—और वेरिफिकेशन का इंतजार।
एक लाइन में: PM गरीब कल्याण अन्न योजना दिसंबर 2028 तक 81.35 करोड़ लाभार्थियों को मुफ्त अनाज देगी; AAY-PHH कोटा साफ है—कार्ड, ऐप और 1967 से हक पक्का करो।
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