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KGMU धर्मांतरण रैकेट का: बड़ा पर्दाफाश, 100 से ज्यादा डॉक्टर शामिल, मौलानाओं से जुड़े तार

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KGMU धर्मांतरण रैकेट का बड़ा पर्दाफाश, 100 से ज्यादा डॉक्टर शामिल, मौलानाओं से जुड़े तार
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📌 खबर के मुख्य बिंदु (Key Highlights):
  • ताजा अपडेट: KGMU धर्मांतरण रैकेट का बड़ा पर्दाफाश, 100 से ज्यादा डॉक्टर शामिल, मौलानाओं से जुड़े तार
  • स्थानीय प्रभाव: घटनाक्रम पर प्रशासन और पुलिस बल की पैनी नजर, स्थिति सामान्य।
  • विस्तृत रिपोर्ट: संपूर्ण विवरण, घटनाक्रम और संबंधित बयानों को नीचे पढ़ें।

लखनऊ (ऑनलाइन समाचार अयोध्या डेस्क): लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) से शुरू हुआ KGMU धर्मांतरण केस अब सिर्फ एक संस्थान तक सीमित नहीं रहा। UP STF की जांच का दायरा बढ़कर आगरा के सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज (SNMC) और एटा मेडिकल कॉलेज तक पहुंच गया है। NDTV, दैनिक जागरण, नवभारत टाइम्स और ETV भारत की रिपोर्ट्स के मुताबिक, जांच एजेंसी को मुख्य आरोपित डॉ. रमीजुद्दीन उर्फ रमीज और उसके करीबी बताए जा रहे डॉ. रिजवान मलिक से जुड़े कथित नेटवर्क में 100 से अधिक डॉक्टरों और मौलानाओं के संपर्क होने की जानकारी मिली है। साथ ही हर महीने जकात के नाम पर करीब 10 लाख रुपये जुटाए जाने का आरोप भी जांच में है। ध्यान रहे, इनमें से कई बिंदु अभी आरोप और जांच के स्तर पर हैं; सभी लोगों की भूमिका अभी साबित नहीं हुई है।

📌 KGMU धर्मांतरण केस: अब तक की बड़ी बातें (Key Highlights)

  • कहां से शुरू हुआ: KGMU की एक महिला डॉक्टर की शिकायत, जिसमें डॉ. रमीज पर दबाव बनाने और धर्मांतरण के लिए मजबूर करने के आरोप लगे; डॉ. रमीज गिरफ्तार होकर जेल में है (ETV भारत)।
  • जांच का दायरा: लखनऊ से आगरा (SNMC), एटा मेडिकल कॉलेज, बस्ती, सहारनपुर के देवबंद और बरेली तक।
  • 100+ संपर्क जांच में: 100 से अधिक डॉक्टरों-मौलानाओं से संपर्क की जानकारी; सभी की भूमिका अभी तय नहीं।
  • ₹10 लाख/माह का आरोप: जकात के नाम पर हर महीने करीब 10 लाख रुपये जुटाने का आरोप; बैंकों को पत्र भेजकर लेनदेन की पड़ताल।
  • ‘इस्लामिक मेडिकोज’: STF को इस नाम के समूह/व्हाट्सऐप ग्रुप की जानकारी, किताबों-पत्रिकाओं से नए छात्रों से संपर्क का आरोप।

कैसे शुरू हुआ KGMU धर्मांतरण केस?

ETV भारत की रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरे मामले की शुरुआत KGMU की एक महिला डॉक्टर की शिकायत से हुई। शिकायत में आरोप था कि डॉ. रमीज ने उन पर अपना प्रभाव जमाया और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाया। कुछ रिपोर्ट्स में यौन शोषण और जबरन गर्भपात कराने के आरोपों का भी जिक्र है। शिकायत के बाद पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू की और डॉ. रमीज को गिरफ्तार किया गया, जो फिलहाल जेल में है। इसके बाद मामले की गहराई से जांच UP STF को सौंपी गई।

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दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने डॉ. रमीज के पिता सलीमुद्दीन और मां खतीजा को भी आरोपित बनाया है। उन पर बेटे की गतिविधियों में मदद और संरक्षण देने का आरोप है। पुलिस यह भी जांच रही है कि क्या पिता-पुत्र एक ही नेटवर्क से जुड़े हैं या अलग-अलग।

आगरा-एटा तक कैसे पहुंची STF की जांच?

NDTV और जागरण के अनुसार, STF की रिपोर्ट में आगरा के सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज (SNMC) और KGMU के कुछ छात्रों के बीच संपर्कों का उल्लेख है। SNMC के पूर्व और वर्तमान छात्रों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। इसी कड़ी में डॉ. रिजवान मलिक का नाम सामने आया, जिसे मुख्य आरोपित डॉ. रमीज का करीबी बताया गया है।

डॉ. रिजवान मलिक करीब पांच साल तक एटा मेडिकल कॉलेज में तैनात रहा। जागरण के मुताबिक, अक्टूबर 2023 में एक असिस्टेंट प्रोफेसर की गाड़ी में तोड़फोड़ के मामले में उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था, जिसमें तत्कालीन प्राचार्य डॉ. रजनी पटेल और अकाउंटेंट अभिषेक सह-आरोपित थे।

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परीक्षा परिणाम पर आरोप (आधिकारिक पुष्टि नहीं): सूत्रों के हवाले से यह आरोप भी सामने आया है कि एटा में तैनाती के दौरान डॉ. रिजवान ने उच्चाधिकारियों से नजदीकी का इस्तेमाल कर कुछ गैर-मुस्लिम छात्र-छात्राओं के परीक्षा परिणाम प्रभावित कराए और उनकी सप्लीमेंट्री लगवाई। जागरण ने स्पष्ट किया है कि इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच जारी है।

‘इस्लामिक मेडिकोज’ ग्रुप: जांच में क्या मिला?

ETV भारत के मुताबिक, STF को ‘इस्लामिक मेडिकोज’ नाम के एक व्हाट्सऐप ग्रुप की जानकारी मिली है। जांच एजेंसी ग्रुप में हुई बातचीत, सदस्यों के आपसी संपर्क और साझा की गई सामग्री की पड़ताल कर रही है। NDTV और जागरण के अनुसार, आरोप है कि इस समूह से जुड़ी पुस्तकों और पत्रिकाओं के जरिए मेडिकल कॉलेजों के पुराने और नए छात्रों के बीच संपर्क बढ़ाया जाता था और नए दाखिला लेने वाले छात्रों को भी इससे जोड़ने की कोशिश होती थी।

NDTV की रिपोर्ट में यह भी आरोप दर्ज है कि KGMU के हॉस्टलों में बाहर से आने वाले मौलाना तकरीर करते थे और डॉ. रमीज भी इन बैठकों में शामिल होता था। STF अब इन बैठकों में शामिल लोगों और उनकी भूमिका की पहचान कर रही है।

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100+ डॉक्टर-मौलाना और ₹10 लाख जकात: दावे में क्या है?

रिपोर्ट्स के अनुसार, STF की जांच में इस नेटवर्क से 100 से अधिक डॉक्टरों और मौलानाओं के संपर्क की जानकारी सामने आने का दावा है। हालांकि जांच एजेंसी के हवाले से यह भी कहा गया है कि इन सभी की भूमिका अभी स्थापित नहीं हुई है। ETV भारत की रिपोर्ट के मुताबिक, STF की जांच में अब तक करीब 25 लोगों की भूमिका सामने आई है, जिनमें 13 डॉक्टर शामिल बताए गए हैं।

आरोप है कि नेटवर्क से जुड़े लोग जकात के नाम पर हर महीने करीब 10 लाख रुपये जुटाते थे। STF इस रकम के स्रोत, बैंक खातों और आपसी लेनदेन की जांच कर रही है और संदिग्ध लेनदेन की जानकारी के लिए बैंकों को पत्र भेजे गए हैं। रिपोर्ट में डॉ. रमीज, डॉ. रिजवान मलिक और अदनान अंसारी समेत कई लोगों के बीच संपर्कों का जिक्र है।

किन शहरों तक फैली जांच?

  • लखनऊ: KGMU के डॉक्टर समेत करीब 12 मेडिकल स्टाफ, शहर के दो निजी मेडिकल कॉलेजों के संचालक और अधिकारी जांच के दायरे में।
  • आगरा: सरोजिनी नायडू मेडिकल कॉलेज के पूर्व और वर्तमान छात्रों के संपर्क।
  • एटा: मेडिकल कॉलेज में डॉ. रिजवान मलिक की करीब 5 साल की तैनाती और उससे जुड़े आरोप।
  • बस्ती, देवबंद (सहारनपुर), बरेली: संस्थानों से जुड़े डॉक्टरों और मौलानाओं की भूमिका की पड़ताल।

आगे क्या?

STF डिजिटल सबूतों, आपसी संपर्कों और वित्तीय लेनदेन के आधार पर संदिग्धों की भूमिका की जांच कर रही है। अधिकारियों के मुताबिक, जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगा कि इस कथित नेटवर्क में कौन-कौन शामिल था और किसकी क्या भूमिका रही। फिलहाल 100+ संपर्क, ₹10 लाख मासिक जकात और परीक्षा परिणाम प्रभावित करने जैसे बिंदु आरोप और जांच के स्तर पर ही हैं।

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स्रोत: NDTV India, दैनिक जागरण, नवभारत टाइम्स, ETV भारत, दैनिक भास्कर। लेख में दर्ज आरोप जांच एजेंसी/सूत्रों पर आधारित हैं, अदालत में साबित नहीं हुए हैं।

फोटो: KGMU लखनऊ परिसर (प्रतीकात्मक) – Bhanu Chaudhary / Wikimedia Commons (CC BY-SA 4.0)।

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