
AI-निर्मित प्रतीकात्मक चित्र
बेंगलुरु। छत पर बना एक कमरे का किराये का मकान, नीचे तीन दुकानें और दीवार पर एक मासिक पत्रिका का बोर्ड। बाहर से सब कुछ सामान्य था, लेकिन पुलिस का दावा है कि इसी घर के अंदर करीब दो हफ्तों में बेंगलुरु 7 हत्याएं हुईं, जिनकी चीखें टीवी की तेज आवाज में दबा दी गईं। राजाजीनगर के 52 साल के कैब ड्राइवर एस. इंदुशेखर पर अपनी पत्नी और ससुराल के छह लोगों की हत्या का आरोप है। इनमें एक सात साल का मासूम भी है।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक मारे गए लोगों में ये शामिल हैं:
अब तक सिर्फ पुनीत का शव चिक्कबल्लापुर जिले में नंदी हिल्स के पास से बरामद हुआ है। बाकी छह शवों की तलाश जारी है। शक है कि शव अलग-अलग जगहों पर फेंके गए, जिनमें तटीय कर्नाटक का चारमाडी घाट भी शामिल हो सकता है।
बेंगलुरु पुलिस कमिश्नर सीमांत कुमार सिंह के मुताबिक आरोपी ने पूछताछ में कबूल किया है कि उसने पीड़ितों को एक-एक कर घर बुलाया, मार डाला और शव अलग-अलग जगह ठिकाने लगा दिए। पुलिस सूत्रों का कहना है कि सबसे पहले सुनीता को सिलबट्टे जैसे भारी पत्थर से मारा गया। इसके बाद उसका फोन बंद कर पड़ोसियों से कह दिया गया कि वह घूमने गई है।
अगले दिन दोनों सालों को पार्टी के बहाने घर बुलाया गया। आरोप है कि उन्हें भी उसी पत्थर से मारा गया और फिर बारी-बारी से दोनों दिव्या, सास रूपावती और मासूम पुनीत की जान ले ली गई। हर वार के वक्त आरोपी टीवी की आवाज बढ़ा देता था, ताकि पड़ोसियों तक कोई आवाज न पहुंचे। खून के निशान मिटाने के लिए केमिकल से घर धोया गया।
इस केस का सबसे सिहराने वाला पहलू आरोपी की 17 साल की बेटी है। पुलिस का कहना है कि शवों को प्लास्टिक की कई परतों में लपेटकर बोरियों में भरने और तड़के कार से ले जाने में बेटी भी साथ थी। उसकी भूमिका की अलग से जांच हो रही है। हत्या में इस्तेमाल किया गया पत्थर और शव ढोने वाली कार जब्त कर ली गई है।
शुरुआती जांच में सामने आया है कि पति-पत्नी के बीच बरसों से झगड़े होते थे। सुनीता एक वकील के यहां टाइपिस्ट थीं और बार-बार मायके जाती थीं। आरोपी को यह बात खटकती थी कि सास और साले सुनीता का साथ देते हैं। सुलह की कोशिशें नाकाम रहीं। पुलिस के मुताबिक हत्याएं 16 से 31 अक्टूबर के बीच हुईं और आखिरी दो शव 1 या 2 नवंबर को ठिकाने लगाए गए।
राज तब खुला जब 3 नवंबर को मृतकों में शामिल नलिनी की मां तुंगम्मा श्रीरामपुरा थाने पहुंचीं। उनकी बेटी का फोन बंद था, घर पर ताला था और इंदुशेखर का घर भी बंद मिला। दिव्या की मां कलावती ने भी बताया कि बेटी और दामाद लापता हैं। पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज कर तकनीकी सुराग जुटाए, आरोपी की लोकेशन ट्रैक की और शहर लौटते ही उसकी कार रोककर उसे दबोच लिया। आरोपी पर 2018 में चेन स्नैचिंग का केस भी दर्ज हो चुका है।
तीन ACP की अगुवाई में करीब 50 पुलिसकर्मियों की स्पेशल टीम शवों की तलाश में लगी है। कमिश्नर ने कहा है कि सबूत जुटाकर केस फास्ट ट्रैक कोर्ट में ले जाया जाएगा। नीचे दुकान चलाने वाले लोगों का कहना है कि उन्हें टीवी पर खबर देखकर ही पता चला कि ऊपर क्या हुआ था। सबसे बड़ा सवाल यही है कि रिहायशी इलाके में सात लोगों की हत्या आखिर किसी को सुनाई कैसे नहीं दी।
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