यश पेपर मिल में इंजीनियर आशीष मौत मामले में जांच तेज, 6 आरोपियों से पूछताछ व बैंक खातों की पड़ताल शुरू।

अयोध्या।
अयोध्या जिले के दर्शन नगर स्थित यश पेपर मिल के केमिकल टैंक में 25 वर्षीय केमिकल इंजीनियर आशीष शिवहरे का शव मिलने के सनसनीखेज मामले में पुलिस ने अपनी जांच का दायरा बढ़ा दिया है। सोमवार को जांच के दूसरे दिन पुलिस टीम ने मामले में नामजद सभी छह आरोपियों से सघन पूछताछ करते हुए उनके विस्तृत बयान दर्ज किए। साथ ही जांच अधिकारियों ने मिल परिसर स्थित घटनास्थल का पुनः बारीकी से निरीक्षण कर महत्वपूर्ण भौतिक व वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए।
पुलिस ने तकनीकी जांच को आगे बढ़ाते हुए मृतक इंजीनियर के लैपटॉप के डेटा को खंगाला है, जबकि उसके मोबाइल फोन को अभी ऑन नहीं किया गया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए आशीष के परिजनों की प्रत्यक्ष मौजूदगी में ही मोबाइल का लॉक खोलकर कॉल डिटेल, चैट और अन्य डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण किया जाएगा।
चूंकि ट्रीटमेंट प्लांट के जिस टैंक में आशीष का शव संदिग्ध अवस्था में मिला था, वहां कोई सीसीटीवी कैमरा नहीं लगा था, इसलिए पुलिस परिसर के अन्य हिस्सों और मुख्य प्रवेश द्वारों पर लगे कैमरों की फुटेज के आधार पर घटना की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। इसके साथ ही पुलिस ने आशीष के बैंक खातों का संपूर्ण विवरण (बैंक स्टेटमेंट) तलब किया है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि हाल के दिनों में उसका किन-किन लोगों के साथ वित्तीय लेनदेन हुआ था।
सूत्रों के अनुसार, जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि मुख्य आरोपी अभिषेक सिंह के अलावा अन्य व्यक्तियों से भी आशीष का लेनदेन था और वह शेयर बाजार में भी निवेश करता था। इसके अतिरिक्त यह जानकारी भी मिली है कि आशीष ने परिवार के एक सदस्य के गंभीर इलाज के लिए कंपनी के उच्चाधिकारियों से लगभग 6 से 7 लाख रुपये का लोन (आर्थिक मदद) मांगा था और इसके लिए उसने आधिकारिक ईमेल भी भेजा था। पुलिस इस वित्तीय पहलू और ईमेल पत्राचार की भी गहराई से पड़ताल कर रही है।
मृतक के चाचा रसीक बिहारी शिवहरे ने बताया कि सोमवार को आशीष का उसके पैतृक गांव में गमगीन माहौल के बीच अंतिम संस्कार कर दिया गया, जहां छोटे भाई अभिषेक ने मुखाग्नि दी। उन्होंने बताया कि बुधवार को परिवार के अन्य सदस्य अयोध्या पहुंचकर पुलिस अधिकारियों से मिलेंगे और जांच की प्रगति की जानकारी लेंगे। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल साक्ष्यों, वित्तीय पड़ताल और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर मामले में अग्रिम विधिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।