चावड़ी बाज़ार इमारत हादसा: गली शीश महल में भरभराकर गिरी निर्माणाधीन बिल्डिंग, 2 मजदूरों की मौत; पुलिस ने 5 महीने पहले ही MCD को किया था आगाह

नई दिल्ली। पुरानी दिल्ली के भीड़भाड़ वाले इलाके में गुरुवार सुबह हुआ चावड़ी बाज़ार इमारत हादसा एक बार फिर राजधानी में अवैध निर्माण और सरकारी लापरवाही की पोल खोल गया। अजमेरी गेट के पास गली शीश महल में स्थित एक भूतल समेत तीन मंज़िला (G+3) इमारत सुबह करीब साढ़े नौ से पौने दस बजे के बीच ताश के पत्तों की तरह ढह गई। हादसे में दो मजदूरों की मौत हो गई, जबकि एक व्यक्ति के घायल होने की खबर है। सूचना मिलते ही दमकल की कम से कम छह गाड़ियां, बचाव दल और पुलिस मौके पर पहुंची और मलबे में राहत-बचाव अभियान चलाया गया।

चावड़ी बाज़ार इमारत हादसा: कैसे ढही पूरी बिल्डिंग

नगर निगम (MCD) की प्रारंभिक रिपोर्ट के मुताबिक मजदूर इमारत की नई बनी तीसरी मंज़िल की छत के नीचे लगी शटरिंग (सपोर्ट) हटा रहे थे। रिपोर्टों के अनुसार यह छत करीब 15 दिन पहले ही डाली गई थी। शटरिंग हटते ही तीसरी मंज़िल का लिंटर गिरा और उसके भार से नीचे की सारी मंज़िलें एक के बाद एक बैठ गईं। करीब 45 वर्ग गज के छोटे से प्लॉट पर खड़ी यह इमारत पूरी तरह मलबे में बदल गई। MCD अधिकारियों के अनुसार प्रदूषण-रोधी पाबंदियों के तहत निर्माण कार्य पर रोक लगने की आशंका में शटरिंग जल्दबाज़ी में हटाई जा रही थी।

पुलिस ने जून में ही दी थी चेतावनी

इस हादसे का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि दिल्ली पुलिस ने 15 जून को ही MCD को पत्र लिखकर इस संपत्ति (नंबर 4547-48, गली शीश महल) पर अवैध निर्माण की जानकारी दे दी थी। पत्र में साफ लिखा था कि परिसर में अनधिकृत निर्माण चल रहा है और संबंधित एजेंसियां कार्रवाई करें। इसके बावजूद निर्माण नहीं रुका। MCD पहले यह कहती रही कि उसे कोई शिकायत नहीं मिली, लेकिन बाद में माना कि निरीक्षण हुआ था और उस समय ‘मरम्मत’ का काम चलता पाया गया।

MCD के रखरखाव विभाग ने 28 अप्रैल को मालिक समीउल्लाह को इमारत की जर्जर हालत को लेकर एडवाइजरी भी जारी की थी, जिसमें योग्य स्ट्रक्चरल इंजीनियर की निगरानी में मज़बूतीकरण कराने और स्थिरता प्रमाणपत्र जमा करने को कहा गया था। एडवाइजरी में स्पष्ट था कि इसे पुनर्निर्माण की अनुमति न माना जाए। लेकिन प्रारंभिक जांच में सामने आया कि मालिक ने मरम्मत की आड़ में दूसरी और तीसरी मंज़िल पर नया निर्माण करा डाला। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार न कोई नक्शा पास था, न कोई अनुमति ली गई थी।

कार्रवाई: इंजीनियर सस्पेंड, FIR की मांग

  • MCD ने संबंधित जूनियर इंजीनियर (JE) और असिस्टेंट इंजीनियर (AE) को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
  • MCD ने स्थानीय पुलिस को लिखित शिकायत देकर मालिक के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की; हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार मुख्यमंत्री ने ठेकेदार पर FIR के निर्देश दिए।
  • स्टैंडिंग कमेटी अध्यक्ष सत्या शर्मा ने तीन दिन में विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी।
  • आसपास की इमारतों का स्ट्रक्चरल सर्वे शुरू, दरारों वाली दो पड़ोसी इमारतें खाली कराई गईं।

टैक्स रिटर्न में G+4, मौके पर G+3

MCD रिपोर्ट ने संपत्ति कर घोषणा में भी गड़बड़ी पकड़ी है। रिकॉर्ड के मुताबिक मालिक ने 22 अप्रैल 2026 को सुनियो योजना के तहत 75,114 रुपये जमा किए थे और स्व-मूल्यांकन में संपत्ति को करीब 80 वर्ग मीटर की G+4 इमारत बताया था, जबकि ढही इमारत G+3 दर्ज थी। अधिकारियों का मानना है कि यह भविष्य में अतिरिक्त मंज़िल का फायदा उठाने की कोशिश थी।

वॉल्ड सिटी में मौत की इमारतें

यह कोई पहला हादसा नहीं है। इसी साल सत्य निकेतन में इमारत गिरने से सात लोगों की जान गई थी, सीमापुरी हादसे में पांच लोग मारे गए थे। हर्ष विहार, सईद-उल-अजायब और रोहिणी में भी इमारतें ढह चुकी हैं। वॉल्ड सिटी में निर्माण के लिए दिल्ली अर्बन आर्ट कमीशन की एनओसी ज़रूरी है, फिर भी तंग गलियों में मंज़िल पर मंज़िल खड़ी हो रही है। सवाल यह है कि जब पुलिस ने लिखित में चेताया था, तो MCD की फाइलें क्यों सोती रहीं? दो मजदूरों की मौत का जवाब अब जांच रिपोर्ट से ही मिलेगा, लेकिन चावड़ी बाज़ार की गलियों में डर का माहौल है और लोग अपने घरों की नींव पर सवाल उठा रहे हैं।

आगे क्या

तीन दिन में आने वाली जांच रिपोर्ट से तय होगा कि लापरवाही की ज़िम्मेदारी किस-किस पर है। पुलिस मालिक और ठेकेदार की भूमिका की पड़ताल कर रही है। आसपास के खतरनाक ढांचों पर भी कार्रवाई शुरू हो गई है।

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